काबू में CAD, कैसे मिली कामयाबी?

मनमोहन सिंह सरकार में इकोनॉमी के लिए सिरदर्द बना रहा चालू खाता घाटा यानी Current Account Deficit (CAD) में पिछले वित्त वर्ष (2014-15) की मार्च तिमाही में जबर्दस्त कमी आई है।
इस दौरान CAD कम होकर $1.3 अरब पर आ गया, जो कि GDP का 0.2% है। दिसंबर तिमाही में ये $8.3 अरब (GDP का 1.6 %) था । अगर बात 2013-14 की मार्च तिमाही की करें तो CAD $1.2 अरब ( GDP का 0.2% ) दर्ज किया गया था। RBI ने इसकी जानकारी दी।

RBI के मुताबिक, 2014-15 में CAD में इससे पहले के फाइनेंशियल वर्ष के मुकाबले कमी आई है। 2014-15 में ये $27.5 अरब (GDP का  1.3%), रहा, जो कि 2013-14 के दौरान $32.4 अरब (GDP का 1.7 %) था।

RBI ने मौजूदा फाइनेंशियल वर्ष में CAD, GDP का 1.5 % रहने का अनुमान लगाया है।

CAD पर काबू की वजहें-
-व्यापार घाटे में कमी
-सोने की इंपोर्ट कीमत में कमी:  मार्च तिमाही में सोने का
इंपोर्ट करीब $3 अरब कम हुआ।
-कच्चे तेल इंपोर्ट की औसत कीमत में कमी : दिसंबर तिमाही
 के मुकाबले मार्च तिमाही में इंपोर्टेड कच्चे तेल की औसत
कीमत में कमी आई।
-काफी बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आया (फॉरेन कैपिटल इनफ्लो बढ़ा)
-आगे भारत में ग्रोथ की संभावना को देखते हुए विदेशी पोर्टफोलियो और डायरेक्ट इनवेस्टमेंट में बढ़ोतरी
-NRI द्वारा भेजी गई रकम में बढ़ोतरी
-अमेरिका में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भी फायदा
-इकोनॉमी में सुधार के लिए मोदी सरकार के उठाए कदमों से विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ा

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