2013 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की खबर से शेयर बाजार में जो रौनक आई उससे देश में धनी परिवारों की संख्या में महज एक साल में ही तीन गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी आई।
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप ने ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि भारत में धनी परिवारों की संख्या 2013 के मुकाबले 2014 में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। 2013 में 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक निजी संपत्ति वाले परिवारों की जहां तादाद 284 थी, वहीं 2014 में ये बढ़कर 928 हो गई। इस रिपोर्ट में नकदी, स्टॉक, सिक्योरिटीज, पेंशन फंड और दूसरे फाइनेंशियल एसेट्स को आधार बनाया गया है। इसमें लोगों के रियल इस्टेट, बिजनेस ओनरशिप और कंज्यूमर गुड्स को शामिल नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संपत्ति में वृद्धि इसकी दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन और भारत की निरंतर वृद्धि से प्रेरित रही। चीन और भारत में निजी संपत्ति में बढ़ोतरी मुख्य तौर पर स्थानीय शेयर बाजारों में निवेश से अर्जित लाभ से प्रेरित रही। जिस समय अवधि को लेकर ये रिपोर्ट तैयार की गई है उस दौरान चीन के शेयर बाजार ने 38% और भारतीय शेयर बाजार ने 23 % की तेजी दर्ज की। वहीं इस दौरान ग्लोबल निजी संपत्ति में करीब 12 % की तेजी आई।
ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट की खास बातें:
-शेयर बाजार में निवेश से तेजी से दौलतमंद बन रहे हैं भारतीय
-भारत की 20% निजी संपत्ति (10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक)
केवल 928 परिवारों के पास, जो कि 2019 तक बढ़कर 24%
हो जाएगी
-10 लाख डॉलर या उससे अधिक निजी संपत्ति महज 36% भारतीय परिवारों के पास, जो कि 2009 में 33 % था और 2019 में बढ़कर 38% हो जाएगा
-भारत 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक की निजी संपत्ति वाले धनी परिवारों की संख्या के हिसाब से दुनिया में चौथे स्थान पर
- धनी परिवारों की संख्या के हिसाब से अमेरिका 5302 परिवारों
के साथ पहले पायदान पर, चीन 1037 के साथ दूसरे स्थान पर,
1019 के साथ ब्रिटेन तीसरे स्थान पर, 928 के साथ भारत
चौथे स्थान पर जबकि 679 परिवारों के साथ जर्मनी पांचवें स्थान
पर
-भारत में 2013 में 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक संपत्ति वाले
परिवारों की तादाद 284 थी, वहीं 2014 में ये बढ़कर 928 हो गई।
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप ने ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि भारत में धनी परिवारों की संख्या 2013 के मुकाबले 2014 में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। 2013 में 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक निजी संपत्ति वाले परिवारों की जहां तादाद 284 थी, वहीं 2014 में ये बढ़कर 928 हो गई। इस रिपोर्ट में नकदी, स्टॉक, सिक्योरिटीज, पेंशन फंड और दूसरे फाइनेंशियल एसेट्स को आधार बनाया गया है। इसमें लोगों के रियल इस्टेट, बिजनेस ओनरशिप और कंज्यूमर गुड्स को शामिल नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संपत्ति में वृद्धि इसकी दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन और भारत की निरंतर वृद्धि से प्रेरित रही। चीन और भारत में निजी संपत्ति में बढ़ोतरी मुख्य तौर पर स्थानीय शेयर बाजारों में निवेश से अर्जित लाभ से प्रेरित रही। जिस समय अवधि को लेकर ये रिपोर्ट तैयार की गई है उस दौरान चीन के शेयर बाजार ने 38% और भारतीय शेयर बाजार ने 23 % की तेजी दर्ज की। वहीं इस दौरान ग्लोबल निजी संपत्ति में करीब 12 % की तेजी आई।
ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट की खास बातें:
-शेयर बाजार में निवेश से तेजी से दौलतमंद बन रहे हैं भारतीय
-भारत की 20% निजी संपत्ति (10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक)
केवल 928 परिवारों के पास, जो कि 2019 तक बढ़कर 24%
हो जाएगी
-10 लाख डॉलर या उससे अधिक निजी संपत्ति महज 36% भारतीय परिवारों के पास, जो कि 2009 में 33 % था और 2019 में बढ़कर 38% हो जाएगा
-भारत 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक की निजी संपत्ति वाले धनी परिवारों की संख्या के हिसाब से दुनिया में चौथे स्थान पर
- धनी परिवारों की संख्या के हिसाब से अमेरिका 5302 परिवारों
के साथ पहले पायदान पर, चीन 1037 के साथ दूसरे स्थान पर,
1019 के साथ ब्रिटेन तीसरे स्थान पर, 928 के साथ भारत
चौथे स्थान पर जबकि 679 परिवारों के साथ जर्मनी पांचवें स्थान
पर
-भारत में 2013 में 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक संपत्ति वाले
परिवारों की तादाद 284 थी, वहीं 2014 में ये बढ़कर 928 हो गई।



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