सोने के दाम ईरान-US शांति वार्ता की उम्मीद से बढ़े, भारत में आयात कर नियमों से चुनौती बनी हुई। Heraeus के अनुसार 2026 में सिल्वर उत्पादन मजबूत रहेगा। गोल्ड और सिल्वर मार्केट लेटेस्ट अपडेट पढ़ें।
सोने की कीमतों में बढ़ोतरी: ईरान ऑप्टिमिज्म और भारत की आयात चुनौतियां
Kitco News के अनुसार, Heraeus Precious Metals की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की कीमतें मध्य पूर्व में ईरान संबंधी सकारात्मक संकेतों के कारण बढ़ रही हैं। अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता और डी-एस्केलेशन की उम्मीद से निवेशकों में सेफ-हेवन डिमांड मजबूत हुई है, जिससे गोल्ड प्राइस को सपोर्ट मिल रहा है।
हालांकि, भारत जैसे बड़े बाजार में आयात संबंधी नई टैक्स नीतियां और नियम सोने-चांदी की सप्लाई चेन पर असर डाल रहे हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, लेकिन आयात पर लगाए गए कर और नियमों ने आयात को जटिल बना दिया है। इसके बावजूद, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर डॉलर सोने को बल दे रहे हैं।
सिल्वर मार्केट आउटलुक 2026:
मजबूत उत्पादन की उम्मीद: Heraeus की रिपोर्ट में सिल्वर प्रोड्यूसर्स के लिए अच्छी खबर है। 2026 में सिल्वर का उत्पादन मजबूत रहने की उम्मीद है। सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV आदि) में वृद्धि और माइनिंग कंपनियों के बढ़ते उत्पादन के कारण यह सकारात्मक आउटलुक बना हुआ है।सिल्वर की कीमतें भी हाल के दिनों में अच्छी रिकवरी दिखा रही हैं, हालांकि यह गोल्ड की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल रहता है। उच्च कीमतों के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में डिमांड पर दबाव है, खासकर भारत में ज्वेलरी और सिल्वरवेयर सेगमेंट में।
मुख्य पॉइंट्स (Heraeus रिपोर्ट से):ईरान ऑप्टिमिज्म: US-Iran शांति प्रगति की खबरों से गोल्ड को सपोर्ट, लेकिन जोखिम अभी भी बाकी।
भारत प्रभाव: आयात नियमों और टैक्स से सप्लाई प्रभावित, जिससे कीमतों पर मिश्रित असर।
2026 सिल्वर आउटलुक: प्रोड्यूसर्स मजबूत उत्पादन की तैयारी में, इंडस्ट्रियल यूज बढ़ने की संभावना।
समग्र ट्रेंड: प्रीशियस मेटल्स में 2026 की पहली छमाही में कंसोलिडेशन, उसके बाद संभावित नई तेजी।
निवेशकों के लिए सलाह:
वर्तमान में गोल्ड और सिल्वर दोनों ही जियो-पॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंक खरीदारी और इन्फ्लेशन से सपोर्टेड हैं। लेकिन भारत में निवेश करने वाले खरीदारों को लोकल टैक्स नियमों और MCX/स्थानीय कीमतों पर नजर रखनी चाहिए। लंबी अवधि में दोनों धातुएं आकर्षक बनी हुई हैं, खासकर डाइवर्सिफिकेशन के लिए।










