Change in Price Band : आज से EL CID Investments, Mangalam Drugs, Gopal Iron समेत इन कंपनियों के Price Band (प्राइस बैंड) में बदलाव

                                                                                                                                  

                                                

आज से EL CID Investments, Mangalam Drugs, Gopal Iron समेत इन कई कंपनियों के Price Band (प्राइस बैंड) में बदलाव किये गए हैं। बीएसई ने इसकी जानकारी दी।                   

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Sr. No.

Scrip Code

Scrip Name

Price Band % Revised to

1

531158

Catvision Ltd

5

2

503681

EL CID Investments Ltd

20

3

540613

Gautam Exim Ltd

2

4

531913

Gopal Iron & Steels Company Gujarat Ltd

10

5

532637

Mangalam Drugs & Organics Ltd

10

6

531680

Mayur Leather Products Ltd

5

7

508922

MSR India Ltd

2

8

512161

Securekloud Technologies Ltd

5

9

536846

Yuranus Infrastructure Ltd

2


 प्राइस बैंड को ही भी सर्किट लिमिट्स कहते हैं।  प्राइस बैंड, एक्सचेंज द्वारा सेट किया गया सुरक्षा उपाय है। जब बहुत ही कम समय में स्टॉक के प्राइस बहुत तेजी से घटते बढ़ते है, तब उसको रोकने में यह काम आता है। जब प्राइस एक्सचेंज द्वारा निर्धारित उप्पर या लोअर सर्किट लिमिट को हिट करती है, तो उस विशेष स्टॉक या कॉन्ट्रैक्ट (EQ, FNO, CDS or MCX) के लिए उस सर्किट प्राइस पर ऑर्डर पेंडिंग रहता हैं।


आसान शब्दों में कहें तो प्राइस बैंड वह प्राइस रेंज है जिसके अंदर ही स्टॉक में उस दिन के लिए ट्रेड कर सकतें है। सर्किट लिमिट 2 से 20% के बीच में हो सकती हैं। यह लिक्विडिटी, वॉल्यूम और शेयरों की केटेगरी के आधार पर तय होती है।

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(साभार: www.bseindia.com)

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3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें' - 
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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Rajanish Kant मंगलवार, 25 नवंबर 2025
Mutual Fund Distributors के लिए गेम-चेंजर! Wealthy.in को मिला ₹130 करोड़ का फंड—जानिए पूरी कहानी

Wealthy.in ने जुटाए ₹130 करोड़: कैसे यह AI से भारत के Mutual Fund Distributors का भविष्य बदल रहा है



भारत में Wealth Management उद्योग तेजी से बदल रहा है, और इसी बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए Wealthy.in ने Series B फंडिंग में ₹130 करोड़ का बड़ा निवेश जुटाया है। यह फंडिंग Bertelsmann India Investments के नेतृत्व में हुई, जिसमें Alphawave Global और Shepherd’s Hill जैसे निवेशकों ने भी भाग लिया।

इस निवेश का सबसे बड़ा मकसद है—AI-powered तकनीक के ज़रिये Mutual Fund Distributors (MFDs) को डिजिटल, कुशल और स्केलेबल बनाना।

भारत के तेजी से बढ़ते WealthTech सेक्टर में Wealthy.in की भूमिका

Wealthy.in भारत का प्रमुख wealth-tech प्लेटफ़ॉर्म है जो Mutual Fund Distributors को आधुनिक तकनीक, रिसर्च और डिजिटल टूल्स प्रदान करता है।
कंपनी के अनुसार:

  • हर महीने ₹300 करोड़+ के ट्रांजेक्शन प्रोसेस होते हैं

  • 6,000+ MFDs प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े हैं

  • 1 लाख+ क्लाइंट्स को सेवा दे रहे हैं

  • ₹5,000 करोड़ की client assets प्रबंधित की जा रही हैं

भारत के 1,000+ शहरों और कस्बों तक अपनी पहुँच बनाकर Wealthy.in खुद को देश के सबसे तेजी से बढ़ते wealth management नेटवर्क के रूप में स्थापित कर चुका है।

नया फंड कहां उपयोग होगा?

कंपनी इस नए निवेश का उपयोग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में करेगी:

1. अत्याधुनिक AI आधारित तकनीक का विस्तार

AI-enabled KYC, portfolio analysis, alerts और client engagement जैसे फीचर्स को और मजबूत किया जाएगा।

2. Tier-2 और Tier-3 शहरों में विस्तार

लक्ष्य है कि छोटे शहरों के MFDs भी बड़े संस्थानों जैसी तकनीक का लाभ उठा सकें।

3. 50,000 Distributors को ऑनबोर्ड करना

कंपनी आने वाले वर्षों में अपना नेटवर्क कई गुना बढ़ाने की योजना में है।

4. ₹1 लाख करोड़ AUM का लक्ष्य

AI आधारित efficiency और व्यापक उत्पाद सूची के ज़रिये कंपनी बड़े पैमाने पर AUM बढ़ाना चाहती है।

Mutual Fund Distributors के लिए Wealthy.in क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में Mutual Fund AUM 75 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है और FY29 तक इसके दो गुना होने की संभावना है।
लेकिन इस तेज़ी के बावजूद MFDs के लिए कई चुनौतियाँ हैं:

  • 70% समय KYC और मैन्युअल कामों में खर्च हो जाता है

  • डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी

  • प्रोफेशनल ब्रांडिंग और टूल्स का अभाव

Wealthy.in इन समस्याओं का समाधान ऐसे कर रहा है:

इन सुविधाओं से स्वतंत्र Distributors अब बिना बड़े निवेश के अपने व्यवसाय को स्केल कर सकते हैं।

कंपनी के संस्थापकों का विज़न

कंपनी के को-फाउंडर आदित्य अग्रवाल के अनुसार, भारत में mutual fund adoption अभी भी बहुत कम है क्योंकि सलाहकारों की कमी है। AI-supported tools इस gap को भर सकते हैं, लेकिन मानव सलाह की मूल्यवान भूमिका को भी बनाए रखते हैं।

दूसरे को-फाउंडर प्रशांत गुप्ता का मानना है कि Wealthy.in एक नया वर्ग तैयार कर रहा है—Wealth Entrepreneurs, जो अपना स्वतंत्र प्रैक्टिस चलाकर लाखों भारतीयों को बेहतर वित्तीय भविष्य दे सकें।

भारत के Wealth Management सेक्टर के लिए क्या मतलब है?

भारत में सिर्फ 15% परिवार ही equity market में निवेश करते हैं—सीधा या mutual funds के जरिए।

जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है, यह संख्या 50–60% तक बढ़ सकती है। AI-driven platforms जैसे Wealthy.in इस ट्रांज़िशन को तेज़ बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

निष्कर्ष

Wealthy.in की यह ₹130 करोड़ की फंडिंग न सिर्फ कंपनी के लिए, बल्कि पूरे Mutual Fund Distribution उद्योग के लिए एक बड़ी छलांग है।
AI, digital infrastructure और professional tools मिलकर देश भर के wealth professionals को सक्षम बनाएँगे कि वे क्लाइंट्स को बेहतर, तेज़ और अधिक विश्वसनीय वित्तीय सलाह दे सकें।

यह भारत में Financial Inclusion और Wealth Creation को एक नया आयाम देने जा रहा है।


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2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें' - 
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
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Rajanish Kant सोमवार, 24 नवंबर 2025
National Mercantile Cooperative Bank में पैसा रखने वालों को RBI से राहत

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश –
नैशनल मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ - निदेशों को वापस लेना



भारतीय रिज़र्व बैंक ने नैशनल मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 9 मार्च 2023 के निदेश सं. LKO.DOS.SED.No.S875/10-03-759/2022-23 के माध्यम से छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए। इन निदेशों को समय-समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसे 10 दिसंबर 2025 को कारोबार समाप्ति तक बढ़ाया गया था।

2. बैंक की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक, इस बात से संतुष्ट होने पर कि जन हित में ऐसा करना आवश्यक है और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए की उप-धारा (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, 21 नवंबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से नैशनल मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ को जारी किए गए उक्त निदेशों को वापस लेता है।

 



(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant
Eurosystem के TARGET Instant Payment Settlement (TIPS)के साथ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को जोड़ना

 यूरोसिस्टम के टारगेट इंस्टेंट पेमेंट सेटलमेंट (टीआईपीएस) के साथ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को जोड़ना



भारतीय रिज़र्व बैंक, सीमापारीय भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) को अन्य क्षेत्राधिकारों की तेज़ भुगतान प्रणाली के साथ जोड़ने पर सक्रिय रूप से ज़ोर दे रहा है। ये पहलें सीमापारीय भुगतान को बढ़ाने के लिए जी20 रोडमैप के साथ जुड़ी हुई हैं, जिसमें सस्ते, कुशल, अधिक पारदर्शी और अधिक आसान विप्रेषण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल), यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर यूपीआई को टीएआरजीईटी इंस्टेंट पेमेंट सेटलमेंट (टीआईपीएस) से जोड़ने की पहल कर रहे हैं, जो यूरोसिस्टम द्वारा संचालित त्वरित भुगतान प्रणाली है। अच्छी और लगातार बातचीत के बाद, दोनों पक्ष यूपीआई-टीआईपीएस लिंक के लिए प्राप्ति चरण (रियलाइज़ेशन फ़ेज़) शुरू करने पर सहमत हो गए हैं।

प्रस्तावित यूपीआई-टीआईपीएस जोड़ने का उद्देश्य, भारत और यूरो क्षेत्र के बीच सीमापारीय विप्रेषण को आसान बनाना है और इससे दोनों क्षेत्राधिकारों के उपयोगकर्ता को लाभ प्राप्त होने की आशा है।

भारतीय रिज़र्व बैंक और एनआईपीएल, तकनीकी एकीकरण, जोखिम प्रबंधन और निपटान व्यवस्था सहित यूपीआई-टीआईपीएस लिंक को परिचालित करने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।




(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant
आज (24-11-2025) शेयर बाजार का हाल

आज (24-11-2025) शेयर बाजार का हाल, सेंसेक्स, निफ्टी गिरा या चढ़ा, सबसे ज्यादा पैसा बनाने वाले 5 शेयर, सबसे ज्यादा पैसा डूबाने वाले 5 शेयर 






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Rajanish Kant
RBI से Shimsha Sahakara Bank Niyamitha को राहत नहीं

 बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश –शिमशा सहकारा बैंक नियमिथा, मद्दुर, मंड्या जिला – अवधि बढ़ाना




भारतीय रिज़र्व बैंक ने शिमशा सहकारा बैंक नियमिथा, मद्दुर, मंड्या जिला को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 23 फरवरी 2023 के निदेश सं. BLR.DOS.SSMS.No.S2174/12-08-295/2022-23 के माध्यम से 24 अगस्त 2023 को कारोबार की समाप्ति तक निदेश जारी किए। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जनहित में उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 24 नवंबर 2025 को कारोबार समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।

2. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उक्त निदेश को 24 नवंबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से 24 मई 2026 को कारोबार की समाप्ति तक अगले छह माह की अवधि के लिए बढ़ाता है, जो कि समीक्षाधीन होगा।

3. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उक्त विस्तार और/या संशोधन का यह अर्थ नहीं लगाया जाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।

4. संदर्भाधीन निदेश के अन्य नियम और शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी।



(साभार- www.rbi.org.in)

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RBI ने Glowmore Finance पर जुर्माना लगाया, जानें क्यों और कितना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने ग्लोमोर फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, ओडिशा पर मौद्रिक दंड लगाया



भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 13 नवंबर 2025 के आदेश द्वारा ग्लोमोर फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, ओडिशा (कंपनी) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘मास्टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – मान आधारित विनियमन) निदेश, 2023’ संबंधी कतिपय प्रावधानों के अननुपालन के लिए 4.00 लाख (चार लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी की उपधारा (5) के खंड (एए) के साथ पठित धारा 58जी की उपधारा (1) के खंड (बी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

कंपनी में एक निदेशक की नियुक्ति से जुड़े आरबीआई और कंपनी के बीच पत्राचार से पता चला कि आरबीआई के निदेशों का पालन नहीं किया गया है। इसके आधार पर, कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर कंपनी के उत्तर, व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों और उनके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

कंपनी प्रबंध तंत्र में बदलाव करने के लिए आरबीआई से पूर्व लिखित अनुमति लेने में विफल रही, जिसके कारण स्वतंत्र निदेशकों को छोड़कर, उसके 30 प्रतिशत से अधिक निदेशक बदल गए।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 


(साभार- www.rbi.org.in)

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