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निजी क्षेत्र के बैंकों की Credit Growth सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में कम रही: RBI

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा ऋण पर तिमाही मूलभूत
सांख्यिकीय विवरणी (बीएसआर)-1– सितंबर 2025

आज, रिज़र्व बैंक ने अपने ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर डेटाबेस’ पोर्टल (https://data.rbi.org.in होमपेज > प्रकाशन) पर ‘तिमाही मूलभूत सांख्यिकीय विवरणी (बीएसआर)-1: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी)1 का ऋण - सितंबर 20252’ शीर्षक से अपना वेब प्रकाशन जारी किया। यह खाता-स्तरीय रिपोर्टिंग के आधार पर बैंक ऋण की विभिन्न वर्गीकरण संबंधी विशेषताओं जैसे कि उधारकर्ता का व्यवसाय/ गतिविधि/ संगठनात्मक क्षेत्र, खाते का प्रकार और उनकी ब्याज दरों को दर्शाता है। एससीबी (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) द्वारा रिपोर्ट किए गए डेटा, बैंक समूहों, जनसंख्या समूहों3 और राज्यों के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं।



मुख्य बातें:

  • बैंक ऋण वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) जून 2025 में 9.9 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2025 में 10.7 प्रतिशत हो गई (चार्ट-I4)।

Chart I
  • बकाया ऋण पर भारित औसत उधार दर (डबल्यूएएलआर) में 64 आधार अंक (बीपीएस) की बड़ी गिरावट देखी गई, जो सितंबर 2024 में 10.20 प्रतिशत से घटकर सितंबर 2025 में 9.56 प्रतिशत रह गई (चार्ट-II)। मुख्य ऋण श्रेणियों में, आवास ऋण में इसी अवधि के दौरान डबल्यूएएलआर में 92 बीपीएस की गिरावट देखी गई।

Chart II
  • सितंबर 2024 से निजी क्षेत्र के बैंकों की ऋण वृद्धि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में कम रही, जिसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी सितंबर 2024 में 53.2 प्रतिशत से थोड़ी बढ़कर सितंबर 2025 में 53.9 प्रतिशत हो गई।

  • सितंबर 2025 में व्यक्तिगत ऋणों में (वर्ष-दर-वर्ष) 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो समग्र ऋण वृद्धि से अधिक थी। तथापि, आवास, शिक्षा, वाहन और अन्य व्यक्तिगत ऋण सहित व्यक्तिगत ऋणों की सभी प्रमुख श्रेणियों में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि में कमी देखी गई।

  • पिछले वर्ष की तुलना में समग्र ऋण वृद्धि में गिरावट के अनुरूप, कृषि क्षेत्र में ऋण वृद्धि सितंबर 2024 में 13.2 प्रतिशत से घटकर सितंबर 2025 में 10.4 प्रतिशत हो गई; उद्योग क्षेत्र में भी इसी प्रकार की प्रवृत्ति देखी गई, जहाँ इसकी वृद्धि इसी अवधि में 10.4 प्रतिशत से घटकर 8.4 प्रतिशत हो गई।

  • सितंबर 2025 में घरेलू क्षेत्र5 का कुल ऋण में हिस्सा एक वर्ष पहले के 57.4 प्रतिशत से बढ़कर 58.5 प्रतिशत हो गया। उक्त अवधि में व्यक्तियों को दिए गए ऋण में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अन्य घरेलू खंडों के लिए यह वृद्धि 14.9 प्रतिशत रही।

  • निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र का कुल ऋण में एक-चौथाई हिस्सा रहा, जिसकी वार्षिक वृद्धि सितंबर 2025 में पिछली तिमाही के 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 9.0 प्रतिशत हो गई।

 

1 सितंबर 2025 के अंतिम रिपोर्टिंग शुक्रवार के लिए पाक्षिक फॉर्म-ए विवरणी (भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 42(2) के अंतर्गत संकलित) पर आधारित बैंकिंग समुच्चय, हमारी वेबसाइट (होम>सांख्यिकी>जारी आंकड़े>पाक्षिक> भारत में अनुसूचित बैंकों की स्थिति का विवरण) पर पहले ही प्रकाशित किए गए थे और चुनिंदा प्रमुख बैंकों द्वारा रिपोर्ट किए गए सितंबर 2025 के लिए बैंक ऋण के क्षेत्र-वार अभिनियोजन पर समग्र स्तर का मासिक डेटा भी वेबसाइट (होम>सांख्यिकी> जारी आंकड़े >मासिक> बैंक ऋण का क्षेत्र-वार अभिनियोजन) पर जारी किया गया।

2 बीएसआर-1 के लिए संदर्भ तिथि तिमाही का अंतिम दिन है। श्रृंखला में पिछला डेटा, जो जून 2025 के अंत की स्थिति को शामिल करता है, 29 अगस्त 2025 को आरबीआई वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था।

3 बीएसआर के लिए उपयोग किया जाने वाला जनसंख्या समूह मानदंड वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार संबंधित राजस्व केंद्र की जनसंख्या के आकार पर आधारित है, जहां एससीबी की शाखाएं संचालित हो रही हैं और इन्हें ए) 'ग्रामीण' (10,000 से कम जनसंख्या), बी) 'अर्ध-शहरी' (10,000 से 1 लाख से कम की आबादी), सी) 'शहरी' (1 लाख से 10 लाख से कम की आबादी), डी) 'मेट्रोपॉलिटन' (10 लाख और उससे अधिक की आबादी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

4 तुलना के उद्देश्य से, सितंबर 2023 से जून 2024 की अवधि के संवृद्धि के आंकड़ों की गणना एक गैर-बैंक के बैंक के साथ विलय को समायोजित करके की गई है।

5 घरेलू क्षेत्र में व्यक्तियों, स्वामित्व वाले उद्यमों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ़) और साझेदारी फर्मों सहित अन्य शामिल हैं।


(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant मंगलवार, 2 दिसंबर 2025
RBI ने जारी की 2025 की D-SIB बैंक सूची — SBI, HDFC और ICICI प्रमुख बने

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 02 दिसंबर 2025 को अपनी वार्षिक प्रेस रिलीज़ जारी की, जिसमें इस साल की D-SIB (Domestic Systemically Important Banks – घरेलू रूप से प्रणालीगत महत्त्वपूर्ण बैंक) की ऑफिशियल सूची घोषित की गई।



प्रमुख बिंदु

  • इस सूची में State Bank of India (SBI), HDFC Bank और ICICI Bank को पुनः D-SIB के रूप में पहचाना गया।

  • बैंक को उनके Systemic Importance Score (SIS) के आधार पर अलग-अलग “बकेट” में रखा गया है।

  • इन बैंकों के लिए अतिरिक्त Common Equity Tier 1 (CET1) पूंजी की जरूरत तय की गई है, जो उनकी जोखिम-संतुलित संपत्तियों (Risk Weighted Assets, RWAs) का एक प्रतिशत या उससे कम हो सकती है, बकेट के अनुसार।

बैंक बकेट अतिरिक्त CET1 पूंजी आवश्यकता (RWAs का %)
State Bank of India (SBI) बकेट – 5                                  1.00% 
HDFC Bank बकेट – 2                                 0.40% 
ICICI Bank बकेट – 1                                    0.20% 

सम्मिलित बैंकों को अतिरिक्त CET1 पूंजी को उनके Capital Conservation Buffer के ऊपर बनाए रखना होगा।” — RBI प्रेस नोट

D-SIB क्या है, और यह क्यों मायने रखता है?

“Systemically Important Banks” वे बैंक होते हैं जिनकी बैंकिंग प्रणाली और देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव होता है — यानी, यदि ये बैंक अस्थिर हो जाएँ, तो इसका प्रभाव सिर्फ उनके ग्राहकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र व आम अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए, RBI उन्हें विशेष रूप से वर्गीकृत करता है और उनकी पूंजी संबंधी आवश्यकता बढ़ा कर उन्हें और अधिक सुरक्षित बनाता है।

यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि ये बड़े बैंक अपने ऋण, कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का सामना करने में सक्षम हों — जिससे बैंकिंग व्यवस्था की स्थिरता व वित्तीय प्रणाली में विश्वास बना रहे।

आपके लिए क्या मायने रखता है

  • यदि आप इन बैंकों (SBI, HDFC, ICICI) के ग्राहक हैं — चाहे वह बचत खाता हो, फिक्स्ड डिपॉज़िट हो, लोन हो या निवेश — तो आप जान लें कि RBI ने उन्हें “अत्यंत महत्वपूर्ण” बैंक माना है।

  • इसका मतलब है कि RBI की निगरानी, पूंजी सुरक्षा व रेगुलेटरी मानक आपके बैंकिंग अनुभव को और सुरक्षित बनाते हैं।

  • बैंकिंग व्यवस्था की कमजोरी आने पर आपके खाते या निवेश पर असर का खतरा कम होता है।

निष्कर्ष

RBI द्वारा D-SIB सूची में SBI, HDFC और ICICI बैंक का पुनः चयन इस बात का संकेत है कि ये बैंक न सिर्फ आकार में बड़े हैं, बल्कि देश की बैंकिंग प्रणाली पर उनकी ज़िम्मेदारी और भरोसे की भूमिका स्पष्ट है। निवेशक, खाता धारक और आम ग्राहक — सभी के लिए यह राहत की बात है।

RBI का यह कदम बैंकिंग संस्थानों में वित्तीय मजबूती, स्थिरता और जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है।

 




(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant
RBI ने Mannakrishna Investments पर जुर्माना लगाया, जानें क्यों और कितना

 देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कुछ दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर Mannakrishna Investments  पर ₹3.10 लाख का जुर्माना लगाया। आरबीआई ने इसकी जानकारी दी। 



-खबर को विस्तार से पढ़ने केलिए इस लिंक पर क्लिक करें 


(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant सोमवार, 1 दिसंबर 2025
RBI ने HDFC Bank पर ₹91.00 लाख का भारी भरकम जुर्माना लगाया, जानें क्यों

 देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने HDFC Bank पर कुछ दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर ₹91.00 लाख का भारी भरकम जुर्माना लगाया है।  RBI ने इसकी जानाकारी दी है। 



-खबर को विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें 



(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant
Lending and Deposit Rates of Scheduled Commercial Banks – November 2025

 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की ऋण और जमा दरें – नवंबर 2025



वर्ष 2025 के नवंबर माह के दौरान प्राप्त अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और लघु वित्त बैंकों को छोड़कर) के ऋण और जमा दर संबंधी आंकड़े सारणी 1 से 7 में प्रस्तुत किए गए हैं।

मुख्य बातें:

ऋण दरें:

  • एससीबी के नए रुपया ऋणों पर भारित औसत उधार दर (डब्ल्यूएएलआर) अक्‍तूबर 2025 में 8.64 प्रतिशत पर रहा (सितंबर 2025 में 8.50 प्रतिशत)।

  • एससीबी के बकाया रुपया ऋणों पर डब्ल्यूएएलआर सितंबर 2025 में 9.26 प्रतिशत से घटकर अक्‍तूबर 2025 में 9.24 प्रतिशत हो गया।

  • एससीबी की एक वर्षीय निधि की सीमांत लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) की माध्यिका अक्‍तूबर 2025 में 8.55 प्रतिशत से कम होकर नवंबर 2025 में 8.50 प्रतिशत हो गई।

जमा दरें:

  • एससीबी की नई रुपया मीयादी जमाओं पर भारित औसत घरेलू मीयादी जमा दर (डब्ल्यूएडीटीडीआर) अक्‍तूबर 2025 में 5.57 प्रतिशत पर रहा (सितंबर 2025 में 5.61 प्रतिशत)।

  • एससीबी की बकाया रुपया मीयादी जमाओं पर डब्ल्यूएडीटीडीआर अक्‍तूबर 2025 में 6.78 प्रतिशत था (सितंबर 2025 में 6.82 प्रतिशत)।



(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant
Personal Loan में 14% की बढ़ोतरी, Home, Gold, Vehicle Loan सबसे ज्यादा लिये गए- RBI

बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – अक्‍तूबर 2025



वर्ष 2025 के अक्‍तूबर माह1 के लिए 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से जुटाए गए बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन संबंधी आंकड़े, जो सभी एससीबी के कुल खाद्येतर ऋण का लगभग 95 प्रतिशत होता है, विवरण I और II में दिए गए हैं।

वर्ष-दर-वर्ष (व-द-व) आधार पर, खाद्येतर बैंक ऋण2 31 अक्‍तूबर 2025 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार 11.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा3, जबकि पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 11.7 प्रतिशत था (अर्थात, 01 नवंबर 2024)।

31 अक्‍तूबर 2025 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार बैंक ऋण3 के क्षेत्रवार अभिनियोजन की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • कृषि और संबद्ध कार्यकलापों हेतु प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 15.5 प्रतिशत)।

  • उद्योग क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 10.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 8.1 प्रतिशत थी। ‘सूक्ष्म एवं लघु’, और ‘मध्यम’ उद्योगों को प्रदत्त ऋण में दो अंकों में वृद्धि जारी रही। बड़े उद्योगों में, ‘सभी अभियांत्रिकी’, ‘आधारभूत संरचना’, ‘निर्माण’, ‘वस्त्र’, और ‘वाहन, वाहन कलपुर्जे एवं परिवहन उपकरण’ के बकाये ऋण में वर्ष-दर-वर्ष उत्प्लवित वृद्धि दर्ज की गई।

  • सेवा क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 13.0 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 12.5 प्रतिशत)। ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (एनबीएफसी) और ‘व्‍यापार’ खंड हेतु प्रदत्त ऋण के वृद्धि में तेजी आई, जबकि ‘वाणिज्यिक स्थावर संपदा’ खंड में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई।

  • ‘वैयक्तिक ऋण’ खंड हेतु प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 14.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 12.9 प्रतिशत थी। वृद्धि में यह सुधार मुख्‍यत: ‘आवास’, ‘स्‍वर्ण आभूषणों पर ऋण’, और ‘वाहन ऋण’ द्वारा संचालित था।

1 आंकड़े माह के अंतिम रिपोर्टिंग शुक्रवार से संबंधित हैं, जो क्षेत्रवार और उद्योगवार बैंक ऋण (एसआईबीसी) विवरणी पर आधारित हैं।

2 खाद्येतर ऋण के आंकड़े माह के अंतिम रिपोर्टिंग शुक्रवार हेतु धारा-42 विवरणी पर आधारित हैं, जिसमें सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी) शामिल हैं।

3 आंकड़ों में बैंक के साथ गैर-बैंक के विलय के प्रभाव को शामिल किया गया है।




(साभार- www.rbi.org.in)

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Rajanish Kant
RBI ने Tumkur Grain Merchants Co-operative Bank पर जुर्माना लगाया, जानें क्यों और कितना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने तुमकूर ग्रेन मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक पर मौद्रिक दंड लगाया



भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 20 नवंबर 2025 के आदेश द्वारा तुमकूर ग्रेन मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक (बैंक) पर आरबीआई द्वारा ‘पर्यवेक्षी कार्रवाई ढांचा (एसएएफ़)’ के अंतर्गत जारी विशिष्ट निदेशों के अननुपालन के लिए ₹1 लाख (एक लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2024 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर, और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

एसएएफ़ के अंतर्गत जारी निदेशों का अननुपालन करते हुए बैंक ने:

i. 100% से अधिक जोखिम-भार वाले नए ऋण और अग्रिम स्वीकृत किए;

ii. मियादी जमाराशि पर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा लगाई गई ब्याज दरों से अधिक ब्याज दरें प्रदान कीं; और

iii. उच्च स्तर के एनपीए/ चूक वाले क्षेत्रों को ऋण सुविधाएं स्वीकृत / नवीनीकृत कीं।

यह कार्रवाई, विनियमकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 


(साभार- www.rbi.org.in)

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1-कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले हर लोगों के लिए जरूरी किताब।
2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
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6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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Rajanish Kant बुधवार, 26 नवंबर 2025
RBI ने The District Co-operative Central Bank, Kurnool पर जुर्माना लगाया, जानें क्यों और कितना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, कुरनूल, आंध्र प्रदेश पर मौद्रिक दंड लगाया



भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 20 नवंबर 2025 के आदेश द्वारा दि डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, कुरनूल, आंध्र प्रदेश (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 56 के साथ धारा पठित धारा 20 के प्रावधानों के उल्लंघन तथा आरबीआई द्वारा जारी 'अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 1.5 लाख (एक लाख पचास हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बीआर अधिनियम की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2024 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। सांविधिक प्रावधानों के उल्लंघन तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त प्रावधानों एवं निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर, और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं , जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

बैंक ने:

i. अपने निदेशकों को ऋण स्वीकृत किए थे; और

ii. निर्धारित समय- सीमा के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) पर अपलोड करने में विफल रहा था।

यह कार्रवाई, सांविधिक और विनियमकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 


(साभार- www.rbi.org.in)

('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'

((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं! 

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1-कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले हर लोगों के लिए जरूरी किताब।
2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें' - 
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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RBI ने The District Cooperative Central Bank पर जुर्माना लगाया, जानें क्यों और कितना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, काकिनाड़ा, आंध्र प्रदेश पर मौद्रिक दंड लगाया



भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 20 नवंबर 2025 के आदेश द्वारा दि डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, काकिनाड़ा, आंध्र प्रदेश (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 56 के साथ धारा पठित धारा 20 के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए 1 लाख (एक लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बीआर अधिनियम की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2024 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। सांविधिक प्रावधानों के उल्लंघन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त प्रावधानों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर, और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

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3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
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6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
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